नमस्कार आज की ब्लॉग पोस्ट में हम आपको बताने जा रहे हैं Damnum Sine Injuria और injuria sine damnum लीगल मैगेजिमस के बारे में दोस्तों यह अगर आप एक वकील है या फिर आप एक लॉ स्टूडेंट है तो आपको इनको जानना बहुत ज्यादा जरूरी है। इस ब्लॉग के माध्यम से मैने Damnum Sine Injuria injuria sine damnum लीगल मैगेजिमस के बारे में बहुत ही आसान हिंदी भाषा में बताने की कोशिश की है आशा करता हूं इस ब्लॉगपोस्ट को पढ़ने के बाद आपके मन मे किसी प्रकार का संदेह नही रहेगा Damnum Sine Injuria injuria sine damnum लीगल मैगेजिमस के बारे में इसे से पहले हम शुरू कर एक बात को अच्छे से जान ले दरसल Damnum Sine Injuria और injuria sine damnum दोनों अलग अलग लीगल मैगेजिमस है। इसलिए हम आपको अलग अलग ही बता रहे है तो सबसे पहले बात करते है injuria sine damno की और बाद में हम जानेंगे Damnum Sine Injuria के बारे में।
1.injuria sine damno
Which means that injury or loss or damage is caused to the plaintiff without suffering any physical injury or damage.
यहां, इस मामले में, वादी को इतने नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता है, उसे केवल यह साबित करना होगा कि उसको कुछ कानूनी क्षति हुई है, उदाहरण के लिए, जहां A बिना किसी औचित्य के B के घर के आसपास घूमता है तो उस स्थिति में, B के कानूनी अधिकार का उल्लंघन होता है तो कहने का मतलब है यहाँ उसके लीगल राइट का डैमेज हुआ है लेकिन उसे किसी भी तरह से शारीरिक रूप से कोई नुकसान नही हुआ है। तो ऐसे में व्यक्ति B व्यक्ति A के ऊपर वाद दायर कर सकता है की उसने उसके के निजता के अधिकार का उल्लंघन किया है।
2. Damnum Sine Injuria
injury which is being suffered by the plaintiff but there is no violation of any legal right of a person.
यहाँ वादी को इन्जरी तो हुई है जिस से वादी पीड़ित भी है लेकिन किसी व्यक्ति के कानूनी अधिकार का कोई उल्लंघन नही हुआ है। तो ऐसी परिस्थितियों में, जहां कानूनी अधिकार का कोई उल्लंघन नहीं होता है, लेकिन चोट, या क्षति द्वारा वादी पीड़ित है, वादी उस दूसरे व्यक्ति के खिलाफ जिसने उसको चोट पहुंचाई उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकता है, क्योंकि यह कानून में कार्रवाई योग्य नहीं है, जब तक कोई कानूनी अधिकार का उल्लंघन नहीं होता है,तब कानूनी अधिकार के उल्लंघन के बिना धन, संपत्ति या किसी भी भौतिक हानि के संदर्भ में नुकसान या क्षति को संदर्भित करता है। यह कानूनन कार्रवाई करने योग्य नहीं है भले ही कृत्य जानबूझकर ही क्यो ना किया गया हो और दूसरे को चोट पहुंच के लिए ही किया गया हो, लेकिन व्यक्ति के कानूनी अधिकार का उल्लंघन किए बिना किया गया है तो ऐसे मे कानूनन उस व्यकि के खिलाफ कोई एक्शन नही लिया जा सकता है।
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Video:- Damnum Sine Injuria and injuria sine damnum in Hindi explained by Advocate Raaj Rathore
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नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है। मेरी इस ब्लॉग स्पॉट पोस्ट पर दोस्तों आज के इस ब्लॉग पोस्ट में मैं आपको बताने जा रहा हूं कि आप कैसे BCR यानी बार काउंसिल ऑफ राजस्थान में अपना एनरॉलमेंट एक वकील के रूप करा सकते है ? और BCR में इनरोलमेंट करने के लिए आपको कौन कौन से डॉक्यूमेंट चाहिए होगे ? और BCR में आपका इनरोलमेंट हो जाने के बाद आपको क्या-क्या फायदा होगा ? इन सारे सवालों के जबाब आज मैं आपको इस पोस्ट के माध्यम से दूंगा ताकि आपके बार काउंसिल ऑफ राजस्थाान में आसानी से रेजिस्ट्रेशन हो जाये। तो दोस्तो अगर आप ने law की डिग्री ले ली है यानी LL.B या B.A.LLB की पढ़ाई पूरी कर ली है औऱ आप राजस्थान से है तो आपके सामने सबसे पहला विकल्प होता है की आप वकील/एडवोकेट के रूप में अपना रजिस्ट्रेशन BCR यानी बार काउंसिल ऑफ राजस्थान में करवाये दोस्तों बीसीआर में रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए आपको सबसे पहले कुछ डॉक्यूमेंट की जरूरत होगी। उन डॉक्यूमेंट को कलेक्ट करने के बाद आप BCR में रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई कर सकते हैं। बार काउंसिल ऑफ राजस्थान में रजिस्ट्रेशन करवाने के बहुत सारे फायदे हैं जब राजस्थान बार ...
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एमिकस क्यूरे कौन होता है ?/ Who is Amicus Curiae ? नमस्कार आपका स्वागत है हमारे ब्लॉक पोस्ट में दोस्तों आज के इस ब्लॉग में हम आपको बताएंगे। एमिकस क्यूरे के बारे में दोस्तों इस ब्लॉग में आप जानेंगे कि एमिकस क्यूरे कौन होता है और एमिकस क्यूरे कि कोर्ट के अंदर क्या भूमिका होती है तो चलिए शुरू करते हैं। दोस्तों एमिकस क्यूरे एक वकील होता है जो बार काउंसिल जिसको अप्वॉइंट करती है कोर्ट को असिस्ट करने के लिए। एमिकस क्यूरे इमेज ~ एडवोकेट राज राठौड़ दोस्तों एमिकस क्यूरे को इसलिए अप्वॉइंट किया जाता है क्योंकि कोर्ट में बहुत बार ऐसे मामले आते हैं जिनमें जज को अपना निर्णय सुनाने में काफी ज्यादा कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है क्योंकि यह जो मामले होते हैं, कुछ इस तरीके/ नेचर के होते हैं जिनके अंदर जज को अपना स्वविवेक से फैसला सुनाना होता है तो हो सकता है। एक व्यक्ति का स्वविवेक एक दूसरे के लिए सही ना हो तो ऐसे मामलों में जज की मदद करते हैं एमिकस क्यूरे। उनको जजमेंट सुनाने में और भी बहुत तरीके से जज की अलग अलग लीगल तकनीकियो वे बारीकियों को समझने में सह...
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